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विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
ज्ञान विनम्रता प्रदान करता है, विनम्रता से योग्यता आती है ।
रूप यौवन सम्पन्नाः विशाल कुल सम्भवाः।
विद्याहीनाः न शोभन्ते निर्गन्धाः इव किंशुकाः।।
अच्छा रूप, युवावस्था और उच्च कुल में जन्म लेने मात्र से कुछ नहीं होता। अगर व्यक्ति विद्याहीन हो, तो वह पलाश के फूल के समान हो जाता है, जो दिखता तो सुंदर है, लेकिन उसमें कोई खुशबू नहीं होती। अर्थात मनुष्य की असली खुशबू व पहचान विद्या व ज्ञान ही है।
ॐ न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते !!
इस सम्पूर्ण संसार में ज्ञान के समान पवित्र और कुछ भी नहीं है।
कश्चित् कस्यचिन्मित्रं, न कश्चित् कस्यचित् रिपु:
अर्थतस्तु निबध्यन्ते, मित्राणि रिपवस्तथा !!
इस संसार में न कोई किसी का मित्र (दोस्त) है न कोई किसी का शत्रु (दुश्मन) है कार्यवश ही लोग एक दूसरे के मित्र और शत्रु बनते हैं!
आलस्य कुतो विद्या अविध्स्य कुतों धनम
अधनस्य कुतो मित्रम अमित्रस्य कूट: सुखम !!
आलसी व्यक्ति के लिए ज्ञान कहाँ हैं, अज्ञानी मुर्ख के लिए धन (पैसा) कहाँ हैं, गरीब के लिए मित्र (दोस् ) कहाँ होते हैं और दोस्तों के बिना कोई कैसे खुश रह सकता हैं!
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात !!
हम उस पूजनीय, ज्ञान का भंडार ईश्वर का ध्यान करते हैं, जिसने इस संसार को उत्पन्न किया है। जो हमें पापों और अज्ञानता से दूर रखता है। वह ईश्वर हमें हमें सत्य का मार्ग दिखाए और इस मार्ग पर चलने का आशिर्वाद दे!
हर्तर्याति न गोचरं किमपि शं पष्णाति यत्सर्वदा
ह्यर्थिभ्यः प्रतिपाद्यमानमनिशं प्राप्नोति वृद्धि पराम् ।
कल्पान्तेष्वपिन प्रयाति निधनं विद्याख्यमन्तर्धन
येषां तान्प्रति मानमुज्झत नृपाः कस्तैः सह स्पर्धते ॥
ज्ञान अद्भुत धन है, ये आपको एक ऐसी अद्भुत ख़ुशी देती है जो कभी समाप्त नहीं होती। जब कोई आपसे ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा लेकर आता है और आप उसकी मदद करते हैं तो आपका ज्ञान कई गुना बढ़ जाता है।शत्रु और आपको लूटने वाले भी इसे छीन नहीं पाएंगे यहाँ तक की ये इस दुनिया के समाप्त हो जाने पर भी ख़त्म नहीं होगी। अतः हे राजन! यदि आप किसी ऐसे ज्ञान के धनी व्यक्ति को देखते हैं तो अपना अहंकार त्याग दीजिये और समर्पित हो जाइए, क्यूंकि ऐसे विद्वानो से प्रतिस्पर्धा करने का कोई अर्थ नहीं है।